एलोवेरा  या घृतकुमारी क्या है, इसका उपयोग कैसे करे की रोग हमेशा के लिये खत्म हो जाए
What is Aloe Vera, How to use it so disease cures forever.




 

एलोवेरा को स्थानीय बोलचाल की भाषा मे ग्वारपाठा के नाम से भी जाना जाता है



इसका पौधा एक से टाई फुट तक ऊंचा एवं बहुवर्षीय प्रकृति वाला होता है । इसकी बडी-बडी गूदेदार, किनारे पर कांटेदार पत्तियां इसके काण्ड से ही निकलती है, ये सघन होती हैं, यह एक से दो फुट लम्बी भालाकार और 2 से  से 4 इंच तक चौडी, नुकीली होती है, गूदा काफी मोटा होता है । घृतकुमारी के पतों को काटने पर एक प्रकार का लिसलिसा पारदर्शक स्वच्छ लौआब निकलता है जो कडुआ होता है । यही इसका परम उपयोगी भाग है । यह देश में प्राय: सभी जगह पाया बाता है । इनकी कटी हुई जड लगाई जा सकती है । बालू वाली जमीन में यह खूब पनपना है । यह कई प्रकार का होता है, पर सके गुण प्राय: एक से होते है


विविध नाम : संस्कृत- घृतकुमारी, हन्दी-ग्वारफाठा, घीकुवार, लेटिन- एलोए बारबेडेनसिस ।




गुण-धर्म- घृतकुमारी स्निग्ध, तिक्त, कटु, किंचित दीपन, पाचन तथा बड़ी मात्रा में बिरेचन, यकृत को शक्ति देने वाली, कृमिनाशक, रक्तशोधक एवं शोथहर है । यह शक्तिवर्धक तथा आर्तवकर एवं गर्भस्रावकारी भी है । इससे अग्निमां, गुल्म, यकृत-प्लीहा वृद्धि, उदरशूल, कब्ज, ग्रंथि, मूत्रक्रच्छ तथा शुक्र दोषों में उल्लेखनीय लाभ मिलता हे । ,



इसमें एलोइन की मात्रा पर्याप्त होती है । एलोइन में कई घटक पाए जाते हैं, जैमे ए-इमोडिन, आइसोवारवैलौइन तथा बार्बेलोइन । इसके अतिरिक्त एलोवेरा में रेनिन एवं एक प्रकार का तेल आदि तत्त्व भी निहित होते हैं ।

 ग्वारपाठा स्वाद में मीठा तीखा कड़वा भारी तथा चिकना होता है,  ग्वारपाठा की प्रकृति ठंडी होती है यह वात तथा कफ को नष्ट करने वाला होता है, यह शरीर में शक्ति की वृद्धि करने वाला और कब्ज दूर करने वाला, खून को साफ करने वाला, अमाशय को बल देने वाला, यकृत और प्लीहा या तिल्ली की वृद्धि को कम करने वाला होता है, यह आंखों के लिए कुल गुणकारी तथा हाजमा को बढ़ाने वाला, पेट के कीड़ों को खत्म करने वाला होता है, बवासीर तथा हड्डियों के जोड़ों के रोगों को ठीक करने में या बहुत लाभकारी है, ग्वारपाठा हृदय रोग से  उत्पन्न गुर्दे की सूजन को दूर करने के लिए अधिक लाभकारी औषधी है यखून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाकर खून की कमी को दूर करता है और पित्ताशय की क्रिया ठीक रूप से चलाने मदद करता है


शास्त्रीय योग - कुमारी आसव या कुमार्यासव, घृ'तकुमारी पाक, रज:प्रवर्तिनी टी, घ्रतकुमारी बटी आदि

एलोवेरा एनर्जी बढ़ाए
नियमित रूप से एलोवेरा जूस को पीने से एनर्जी आती है एलोवेरा जूस में कई तरह के पोषण तत्व विटामिन और मिनरल होते हैं जो बॉडी सिस्टम मे सुधार करते हैं और उसे एनर्जी देते हैं, इसे पीने से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता भी बढ़ती है, इसके कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है, तीन से चार चम्मच रस सुबह खाली पेट लेने से दिनभर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति रहती है,


बालों और त्वचा की सुंदरता बढ़ाए एलोवेरा जूस के सेवन से त्वचा में निखार आने लगता है इसके नियमित सेवन से आपकी त्वचा लंबे समय तक जवा और चमकदार लगती है एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुंहासे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी, चेहरे के दाग धब्बों, आंखों के काले घेरे को दूर किया जा सकता है ।  खुजली, मुहांसे और फुंसी होने पर प्रतिदिन 10 से 25 ML एलोवेरा रस पीना चाहिए यखून को शुद्ध करता है और चेहरे से मुहांसों को भी हटा देता है, एलोवेरा जूस बालों के लिए भी फायदेमंद है इसको पीने से बालों में चमक आती है रूसी दूर हो जाती है और टेक्सचर भी अच्छा हो जाता है एलोवेरा का जूस मेहंदी मे मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार और स्वस्थ होते हैं


अच्छा पाचक एलोवेरा एलोवेरा जूस में प्रचुर मात्रा में पाचक तत्व होते हैं, इसमें मौजूद एंटि इंफलामेटरी गुणों के कारण पेट के रोगों में फायदा करता है, एलोवेरा जूस के सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है,




विषैले पदार्थो को बाहर करना
हमारे शरीर में मौजूद कई तरह के विषैले तत्व त्वचा को खराब और बॉडी सिस्टम पर बुरा प्रभाव डालते हैं इसलिए बॉडी को विषैले पदार्थों से मुक्त करने की जरूरत होती है ऐसे में एलोवेरा जूस एक अच्छा डिटॉक्सिफिकेशन करने वाला है

पीलिया में ग्वारपाठा का उपयोग- ग्वारपाठा का 10 से 20 मिलीलीटर रस दिन में दो से तीन बार पीने से पित्त नलिका का अवरोध दूर होकर लाभ मिलता है इस प्रयोग से आंखों का पीलापन और कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है इसके रस को रोगी की नाक में दो-दो बूंद करके डालने से नाक से निकलने वाले पीले रंग का स्राव होना बंद हो जाता है


वजन कम करें नियमित रूप से एलोवेरा जूस पीने से बढ़ा हुआ वजन कम होने लगता है और इसे पीने से बार-बार खाने की आदत भी दूर हो जाती है और आपकी पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है




ग्वारपाठे के रस का उपयोग - ग्वारपाठे के पत्तों का रस 20 से 40 मिलीमीटर प्रतिदिन खाली पेट लेना चाहिए ।


विशेष - घृत कुमारी से निर्मिन कोई दवा लंबे समय तक न लें, बीच-बीच में कुछ दिन पीना बन्द करे, जिन्हे पेचिस-दस्त हो उन्हें यह नहीं लेना चाहिए । अधिक बडी मात्रा में भी इसे न लें ।

गर्भवती माताओं और स्तनपान के दौरान ग्वारपाठा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यहां उनके लिए हानिकारक हो सकता है, यदि रक्त स्राव हो रहा हो तो इस अवस्था में इसका सेवन हानिकारक हो सकता है, ग्वारपाठा का अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में मरोड़ के साथ दस्त आना शुरू हो सकते हैं

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